कैसे करें कुबेर देव को प्रसन्न ” क्या हैं कुबेर देव के प्रभावशाली मंत्र “

संसार में ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसे धन प्राप्ति की अभिलाषा ना हो, ऐसे व्यक्ति सिर्फ साधू संत ही हो सकते हैं। एक आम गृहस्थ जीवन जीने वाले व्यक्ति को पैसे की आवश्यकता सदैव लगी ही रहती है।

धनप्राप्ति के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने का विधान है। कुबेर देवता को इस समूची धरती और तीनो लोकों की दौलत का अध्यक्ष कहा जाता है और उन्हें प्रसन्न करने से आप जीवन में ढेर सारी सुख समृद्धि और दौलत को आकर्षित कर सकते हैं।

कुबेर जी को प्रसन्न करने के लिए कई सारे मंत्र हैं इनमे से कुछ मन्त्रों का संग्रह हम निचे दे रहे हैं।

1. ॐ यक्षाय कुबेराय वैष्णवराय धन धान्यधिपतये धनधान्य समृद्धिं में देहि दापय स्वाहा

2. ॐ वैश्रवणाय स्वाहा

3. ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्टलक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय नमः

प्रतिदिन इन मन्त्रों का जाप करने से लक्ष्मी माँ और कुबेर जी की कृपा होनी प्रारम्भ होनी प्राप्त हो जाती है।

कृपया ध्यान दें की आपको पूजा पाठ और मंत्र जाप के साथ ही साथ अपने कर्म में भी बेहतर होना पड़ेगा क्यूंकि आपके कर्मों का फल अवश्य मिलता है और अगर कर्मों के साथ मन्त्रों की शक्ति जुड़ जाए तो परिणाम जल्दी और बेहतर होता है।

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तीसरा नवरात्र पूजा विधि और मंत्र ” ऐसे प्रसन्न करें माँ चंद्रघंटा को “

नवरात्री के तीसरे दिन माँ के चंद्रघंटा स्वरुप की पूजा होती है, माँ के इस स्वरुप की दस भुजाएं हैं जिनमे भिन्न भिन्न अस्त्र शस्त्र हैं तथा माथे पर चंद्र सुशोभित है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए माँ को आसान देकर स्थापित करें और गंगाजल और गौमूत्र से माँ को स्नान कराएं तथा फूल फल कुमकुम सिंदूर अक्षत इत्यादि माँ को अर्पित करें।

ऐसी मान्यता है की माँ को दूध और दूध से निर्मित व्यंजन बहुत पसंद है तो आप अपनी सुविधा के अनुसार माँ को सब अर्पण करें जो आप कर सकें। ध्यान दें की माँ को प्रसन्न करने के लिए सच्ची श्रद्धा और माँ के प्रति आस्था का होना आवश्यक है।

माँ को व्यंजन अर्पित करने के बाद आप माँ का मंत्र जाप करें जो हमने निचे दिया हुआ है और अंत में माँ की आरती उतारें तथा प्रसाद वितरण करें और स्वयं भी ग्रहण करें। माँ का मंत्र इस प्रकार है

मंत्र : ” ॐ देवी चन्द्रघंटाये नमः “

इस मंत्र का 108 या 1008 जाप आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं, इस प्रकार आप माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न कर सकते हैं और माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और अध्यात्म साहस और बल में वृद्धि होती है। माँ के इस स्वरुप की महिमा अपरम्पार है और हमें माँ की पूजा करके उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

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नवरात्री के दूसरे दिन की पूजा विधि ” जानें माँ ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के उपाय “

नवरात्री के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। माँ के एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में माला है, माँ ने भगवान शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की थी जिसके बाद उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।

माँ की पूजा करने की विधि इस प्रकार है, आप नहा कर साफ़ सुथरे वस्त्र धारण कर लें और हाथ में पुष्प और माला लेकर माँ को अर्पित करें और साथ ही साथ पंचामृत ( दूध, दही, घी, शक्कर और मधु ) से माँ को स्नान कराएं और तत्पश्चात फूल, सिन्दूर, अक्षत, चावल और कुमकुम अर्पित करें। माँ की पूजा में लाल फूल चढ़ाना शुभ फलदायक है। इसके बाद माँ को प्रसाद चढ़ाये और तीन बार प्रदक्षिणा करें अर्थात 3 बार अपनी जगह पर घूमें। ऐसा सब करने के बाद निम्नलिखित मंत्र का जाप करें।

माँ ब्रह्मचारिणी का मंत्र : ह्रीं श्रीं अम्बिकाये नमः

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से तप, संयम, सदाचार, त्याग और वैराग्य की वृद्धि होती है और माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता hai.

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माँ शैलपुत्री को प्रसन्न कैसे करें ” नवरात्री के पहले दिन की पूजा विधि और मंत्र “

चैत्र नवरात्री की शुरुवात हो चुकी है और कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच माँ का आगमन हो रहा है अर्थात भारतवर्ष को और संपूर्ण धरती को कोरोना से बचाने माँ स्वयं आ रही हैं आइये हम माँ से विश्वशांति के लिए प्रार्थना करें और जानें कि किस प्रकार हम माँ को प्रसन्न कर सकते हैं।

दोस्तों जैसा की आप जानते हैं की सनातन धर्म में मानसिक पूजा अर्थात ध्यान को सबसे अधिक महत्वा दिया गया है इसका सीधा सीधा मतलब है कि लॉक डाउन कि वजह से अगर आप के पास पूजन सामग्री कि कमी हो तो भी आप सच्चे मन से माँ कि पूजा करें माँ प्रसन्न अवश्य होंगी क्यूंकि माँ का कोमल हृदय हम भक्तों के भाव को पढ़ सकता है और जैसा कि कहा गया है ” जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि ”

यहाँ हम माँ शैलपुत्री के पूजन की विधि दे रहे हैं लेकिन आप अपने सामर्थ्य अनुसार जो बन पड़े उसी हिसाब से माँ का पूजन करें आपकी पूजा अवश्य स्वीकार होगी क्यूंकि माँ सब जानती है और माँ हमारा कल्याण करने ही तो आ रही है,

है ना ?

चलिए तो आगे बढ़ते हैं, आज सबसे पहले कलश की स्थापना करते हैं, उसके बाद माँ को फूल, फल, चन्दन, अक्षत धुप तथा सिंदूर इत्यादि माँ को चढ़ाया जाता है इसके बाद घी का दीपक जलाकर माँ की आरती की जाती है और निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है।

शैलपुत्री मंत्र : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्रये नमः

इस मंत्र के सही उच्चारण के लिए आप निचे दिए गए यूट्यूब वीडियो देखें और हमारा चैनल सब्सक्राइब अवश्य कर लें ताकि आप पुरे नौ दिन नौ देवियों के मंत्र सुन सकें। 25 मार्च को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:05 बजे से 07:01 के बीच में है।

माँ शैलपुत्री राजा शैल की पुत्री हैं और इनके एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में कमल का पुष्प और माथे पर चन्द्रमा प्रकाशमान है जो माँ की छटा को और भी भव्य बना देता है। माँ शैलपुत्री का स्वाभाव सरल है और ये सुख सम्पति, धन धान्य तथा हर प्रकार का सुख प्रदान करने वाली देवी हैं।

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आ रही हैं माँ 25 मार्च 2020 को – ऐसे करें माँ की पूजा

हर साल की तरह 2020 में भी माँ आ रही हैं और ढेर सारी खुशियां भी ला रही हैं, 25 मार्च को माँ का आगमन होगा और 02 अप्रैल को रामनवमी के दिन पारण होने के साथ ये पर्व समाप्त होगा। माँ का ये आगमन भारतवासियों और संपूर्ण जगत के कल्याण के लिए है और इसीलिए ये ज़रूरी है की हम माँ से पुरे भारतवर्ष और विश्व की शांति के लिए प्रार्थना करें ताकि सबके जीवन में सुख शांति और उजाला ho.

हम सभी जानते हैं की 9 दिन माँ के विभिन्न रूपों की पूजा होती है। देखते हैं किस दिन कौन से स्वरुप की करें पूजा।

25 मार्च : ये नवरात्री का पहला दिन है और इस दिन माता शैलपुत्री की पूजा होती है।

26 मार्च : नवरात्री के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है।

27 मार्च : नवरात्री के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है।

28 मार्च : नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है।

29 मार्च : आज नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। \

30 मार्च : नवरात्री के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है।

31 मार्च : नवरात्री के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है माँ का ये रूप देखने में भले ही भयानक हो पर ये बहुत ही दयालु और कृपा प्रदान करने वाली hain.

01 अप्रैल : नवरात्री के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है जो माँ का अत्यंत ही सुन्दर और दिव्य स्वरुप है।

02 अप्रैल : नवरात्री के नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती hai

इस बार की नवरात्री में कई शुभ संयोग बन रहे हैं इसलिए माँ के भक्तों को माँ की पूजा आराधना पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए।

विशेष : कृपया ध्यान दें देश भर में फैल रहे कोरोना को देखते हुए सरकारी आदेशों का पालन अवश्य करें और व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग प्रदान करें। ध्यान रहे माँ को प्रसन्न करने के लिए मन का पवित्र होने ज़रूरी है, अगर आप काम वस्तुओं में भी पूजन करें तो भी माँ का पूरा आशीर्वाद आपको मिलेगा इसलिए बेवजह की भीड़भाड़ से बचें और आंतरिक पूजा पर विशेष ध्यान dein.

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