तीसरा नवरात्र पूजा विधि और मंत्र ” ऐसे प्रसन्न करें माँ चंद्रघंटा को “

नवरात्री के तीसरे दिन माँ के चंद्रघंटा स्वरुप की पूजा होती है, माँ के इस स्वरुप की दस भुजाएं हैं जिनमे भिन्न भिन्न अस्त्र शस्त्र हैं तथा माथे पर चंद्र सुशोभित है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए माँ को आसान देकर स्थापित करें और गंगाजल और गौमूत्र से माँ को स्नान कराएं तथा फूल फल कुमकुम सिंदूर अक्षत इत्यादि माँ को अर्पित करें।

ऐसी मान्यता है की माँ को दूध और दूध से निर्मित व्यंजन बहुत पसंद है तो आप अपनी सुविधा के अनुसार माँ को सब अर्पण करें जो आप कर सकें। ध्यान दें की माँ को प्रसन्न करने के लिए सच्ची श्रद्धा और माँ के प्रति आस्था का होना आवश्यक है।

माँ को व्यंजन अर्पित करने के बाद आप माँ का मंत्र जाप करें जो हमने निचे दिया हुआ है और अंत में माँ की आरती उतारें तथा प्रसाद वितरण करें और स्वयं भी ग्रहण करें। माँ का मंत्र इस प्रकार है

मंत्र : ” ॐ देवी चन्द्रघंटाये नमः “

इस मंत्र का 108 या 1008 जाप आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं, इस प्रकार आप माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न कर सकते हैं और माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और अध्यात्म साहस और बल में वृद्धि होती है। माँ के इस स्वरुप की महिमा अपरम्पार है और हमें माँ की पूजा करके उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

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माँ शैलपुत्री को प्रसन्न कैसे करें ” नवरात्री के पहले दिन की पूजा विधि और मंत्र “

चैत्र नवरात्री की शुरुवात हो चुकी है और कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच माँ का आगमन हो रहा है अर्थात भारतवर्ष को और संपूर्ण धरती को कोरोना से बचाने माँ स्वयं आ रही हैं आइये हम माँ से विश्वशांति के लिए प्रार्थना करें और जानें कि किस प्रकार हम माँ को प्रसन्न कर सकते हैं।

दोस्तों जैसा की आप जानते हैं की सनातन धर्म में मानसिक पूजा अर्थात ध्यान को सबसे अधिक महत्वा दिया गया है इसका सीधा सीधा मतलब है कि लॉक डाउन कि वजह से अगर आप के पास पूजन सामग्री कि कमी हो तो भी आप सच्चे मन से माँ कि पूजा करें माँ प्रसन्न अवश्य होंगी क्यूंकि माँ का कोमल हृदय हम भक्तों के भाव को पढ़ सकता है और जैसा कि कहा गया है ” जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि ”

यहाँ हम माँ शैलपुत्री के पूजन की विधि दे रहे हैं लेकिन आप अपने सामर्थ्य अनुसार जो बन पड़े उसी हिसाब से माँ का पूजन करें आपकी पूजा अवश्य स्वीकार होगी क्यूंकि माँ सब जानती है और माँ हमारा कल्याण करने ही तो आ रही है,

है ना ?

चलिए तो आगे बढ़ते हैं, आज सबसे पहले कलश की स्थापना करते हैं, उसके बाद माँ को फूल, फल, चन्दन, अक्षत धुप तथा सिंदूर इत्यादि माँ को चढ़ाया जाता है इसके बाद घी का दीपक जलाकर माँ की आरती की जाती है और निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है।

शैलपुत्री मंत्र : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्रये नमः

इस मंत्र के सही उच्चारण के लिए आप निचे दिए गए यूट्यूब वीडियो देखें और हमारा चैनल सब्सक्राइब अवश्य कर लें ताकि आप पुरे नौ दिन नौ देवियों के मंत्र सुन सकें। 25 मार्च को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:05 बजे से 07:01 के बीच में है।

माँ शैलपुत्री राजा शैल की पुत्री हैं और इनके एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में कमल का पुष्प और माथे पर चन्द्रमा प्रकाशमान है जो माँ की छटा को और भी भव्य बना देता है। माँ शैलपुत्री का स्वाभाव सरल है और ये सुख सम्पति, धन धान्य तथा हर प्रकार का सुख प्रदान करने वाली देवी हैं।

आपको ये लेख कैसा लग कृपया हमें कमेंट में सूचित करें और इसी प्रकार के अन्य लेखों के लिए इस वेबसाइट तो सब्सक्राइब करना ना भूलें , माँ आपके जीवन में सुख शांति स्थापित करें यही हमारी प्रार्थना hai.